Saturday, August 18, 2012

भीगे पन्ने

भीगे पन्नो की एक कहानी है 
आज बारिश को यूँ सुनानी है 
लिखा तो बहुत था उनपे 
उन्ही शब्दों मैं यह बह जानी है 

श्याही चाहे पकड़ न सकी 
फिर भी ख्वाबो की दुनिया अनजानी है 
कुछ बूंदे ही लगी उन्हें मिटाने
फिर भी उसे पहचान अपनी जतानी है 

उस श्याही को यूँ दाग न कहो 
इन्हें अब भी दास्ताँ जतानी है 
भीगे पन्नो की एक कहानी है 
आज बारिश को यूँ सुनानी है 

1 comment:

Vishal said...

Never knew you had a poet in you :)